कौन हैं आप, सोनियाजी?

वफ़ा के नाम पर बदनुमा दाग हैं आप
आपको बेवफ़ा कहकर उस लब्ज़ की तौहीन नहीं करूंगा

आपके गुनाह गिनवा रहा हूं
अपने बचावमें जो कहना है, कहें

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अब आप यह बतायें, सोनिया जी, आप कौन हैं

और क्यों भारत को बरबाद करने आगये थे आप

अंग्रेजी में बोलकर कामियाब साकी बनने के बहाने

रूस व पाकिस्तान की मदद से कैम्ब्रिज गये थे आप

वहां राजीव को न जाने क्या मिलावटी चीज़ पिलादी

नेहरू परिवार की बहू बनने भारत आ गये थे आप

रावलपिंडी के इशारोंपर भारत पर काबू पाने के लिये

अस्सी में संजय का खून करवाने में कामियाब हुये थे आप

देश पर जान निसार करते सिखों की निशानी

सिखणी मनेका को गांधी-घरसे भगा दिये थे आप

सरदारो के हाथ इंदिरा को मरवाया, राजीव को भडकाया

हज़ारों सिखोंको बेमौत मरवा भी दिये थे आप

माफ़ियाके हथियार-दलालोंसे तोपों का सौदा करवाया

उसी बहाने राजीव को चुनाव में हरवा दिये थे आप

उस राज़ को दफ़्न रखने क्वात्रोकी को फ़रार होने दिया

राज़ छुपाने राजीव का खून लेट्टोंसे करवा दिये थे आप

खाविंद के कातिलोंको फ़ांसीसे मुआफ़ी दिलायी

लाखों तमिलोंको लंका में झुलसा दिये थे आप

वतन को दोनो हाथोंसे लूटकर सियासत को गाली दी

मत में मतभेद लाने हजारे का इस्तेमाल किये थे आप

इंडिया पर दस साल नाजायज़ हुकूमत की

गद्दारी और दहशियत की सियासत किये थे आप

भारत में आम आदमी को गुमराह करने

आप-पार्टी के ज़रिये भारत में फ़ूट पडवाये थे आप

नाम के वालिद पाओलो की गैर हाज़िरीमें पैदा हुई हैं

किस वतन की हैं यह पता नहीं चलने दिये थे आप

अब आप यह बतायें, सोनिया जी, आप कौन हैं

और क्यों भारत को बरबाद करने आगये थे आप

कच्चा चिट्ठा

https://haritsv.wordpress.com/2016/05/22/sonia-gandhi-indias-lady-macbeth/

साकी व साखी में बहुत फ़र्क है बीबी!

आप साकी हैं सोनियाजी!

हरिवंश राय बच्चन के बोल

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,

प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,

पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,

सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला

प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला,

एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्याला,

जीवन की मधुता तो तेरे ऊपर कब का वार चुका,

आज निछावर कर दूँगा मैं तुझ पर जग की मधुशाला

काश आप साखी होतीं

साखी, सबदी, दोहरा, कहि कहनी उपखान।

भगति निरूपहिं अधम कवि, निंदहिं वेद पुराण

आपको चेतावनी

साह सिकंदर जल में बोरे

बहुरि अग्नि परजारे

मैमत हाथी आनि झुकाए

सिंहरूप दिखराए

निरगुन कथैं

अभयपद गावैं

जीवन को समझाए

काजी पंडित सबै हराए

पार कोउ नहिं पाए

उर्दू में भी

साकी शराब ला कि तबीयत उदास है

मुतरिब रबाब उठा कि तबीयत उदास है।

चुभती है कल वो जाम-ए-सितारों की रोशनी

ऐ चाँद डूब जा कि तबीयत उदास है।

है हुस्न का फ़ुसूँ भी इलाज-ए-फ़सुर्दगी

रुख़ से नक़ाब उठा कि तबीयत उदास है।

Author: haritsv

42 years' unblemished record of being an investigative journalist. Print quality journalist in 3 languages - English, Tamil, Hindi. Widely travelled, worldwide. Cantankerous and completely honest.

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